Do these 7 things instead of wasting your free time.
खाली समय बर्बाद करने के बजाय ये 7 काम करें
मध्यवर्गीय जीवन को बेहतर बनाने के 7 आसान और वास्तविक तरीके
Presented by Gaurav Kumar
हम सभी के जीवन में कुछ ऐसे घंटे जरूर आते हैं, जब हमारे पास करने के लिए कोई जरूरी काम नहीं होता।
नौकरी से घर लौटने के बाद का समय, रविवार की दोपहर, छुट्टी का दिन या सुबह उठने के बाद के कुछ घंटे—ये समय देखने में बहुत छोटा लगता है |
लेकिन असल में यही छोटे-छोटे समय हमारे जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
मध्यवर्गीय परिवारों में यह बात और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
क्योंकि हर किसी के पास महंगे कोर्स करने, जिम जाने, विदेश घूमने या अपने लिए पूरा दिन निकालने का अवसर नहीं होता।
अधिकांश लोग नौकरी करते हैं, घर का किराया देते हैं, बिजली-पानी का बिल भरते हैं |
परिवार की जरूरतें पूरी करते हैं और भविष्य के लिए थोड़ा-बहुत बचाने की कोशिश करते हैं।
ऐसे जीवन में खाली समय वास्तव में बहुत कीमती होता है।
लेकिन आज हमारे हाथ में एक ऐसा उपकरण है जो इस पूरे समय को बिना पता चले खा जाता है—मोबाइल फोन।
हम कहते हैं, “बस पांच मिनट इंस्टाग्राम देखता हूँ।”
फिर एक वीडियो आता है, उसके बाद दूसरा, फिर तीसरा। अचानक पता चलता है कि पैंतालीस (45) मिनट निकल चुके हैं।
समस्या यह नहीं है कि हम आराम करते हैं।
समस्या तब शुरू होती है जब हमारा आराम हमें बेहतर महसूस कराने के बजाय और ज्यादा थका हुआ, बेचैन और खाली महसूस कराने लगता है।
इसलिए सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “खाली समय में मुझे हमेशा काम ही क्यों करना चाहिए?”
सही सवाल यह है—
“मेरे पास जो थोड़ा-सा समय है, उसे मैं अपने जीवन के लिए कैसे उपयोगी बना सकता हूँ?”

आइए ऐसे सात काम समझते हैं, जिन्हें एक सामान्य मध्यवर्गीय व्यक्ति बिना बहुत पैसा खर्च किए अपनी जिंदगी में शामिल कर सकता है।
1. हर दिन कुछ पढ़िए

पढ़ने के लिए आपको महंगी किताबों की अलमारी की जरूरत नहीं है।
आप एक किताब खरीद सकते हैं, पुस्तकालय जा सकते हैं, विश्वसनीय लेख पढ़ सकते हैं या किसी अच्छे विषय पर उपलब्ध सामग्री से सीख सकते हैं।
जरूरी यह है कि आपका दिमाग रोज कुछ ऐसा पढ़े जिससे उसकी दुनिया थोड़ी बड़ी हो।
मध्यवर्गीय व्यक्ति के लिए पढ़ना विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि ज्ञान उन चीजों में से एक है जिसके लिए बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं होती।
आप वित्त पढ़ सकते हैं।
इतिहास पढ़ सकते हैं।
अपने काम से जुड़ी कोई नई चीज सीख सकते हैं।
अंग्रेजी सुधार सकते हैं।
व्यवसाय, तकनीक, विज्ञान या मनोविज्ञान के बारे में पढ़ सकते हैं।
यहां तक कि किसी महान व्यक्ति की जीवनी पढ़ना भी उपयोगी हो सकता है।
दुनिया के प्रसिद्ध निवेशक Warren Buffett अपने पढ़ने की आदत के लिए जाने जाते हैं। उनके बारे में प्रकाशित विवरणों के अनुसार, वे अपने दिन का काफी समय पढ़ने और सोचने में लगाते रहे हैं। उनके लिए ज्ञान कोई ऐसी चीज नहीं थी जिसे एक बार हासिल करके छोड़ दिया जाए; वह लगातार जमा होने वाली पूंजी थी।
लेकिन यहां एक गलती नहीं करनी चाहिए।
आपको Buffett की तरह प्रतिदिन सैकड़ों पन्ने पढ़ने की जरूरत नहीं है।
यदि आप रोज केवल 10 पन्ने पढ़ते हैं, तो एक वर्ष में लगभग 3,650 पन्ने पढ़ सकते हैं।
दस पन्ने छोटे लगते हैं।
लेकिन दस पन्ने रोज करना बड़ी बात बन सकता है।
बड़ी उपलब्धियां अक्सर बड़े प्रयासों से नहीं, छोटे प्रयासों की निरंतरता से बनती हैं।
आदतों पर लिखने वाले James Clear भी छोटे और आसान कदमों से शुरुआत करने की सलाह देते हैं। उनका तर्क है कि आदत को इतना छोटा बनाया जाए कि उसे शुरू करना मुश्किल न लगे।
इसलिए आज से 10 पन्नों से शुरुआत कीजिए।
2. शरीर को चलाइए

मध्यवर्गीय व्यक्ति के पास अक्सर जिम की फीस के लिए अलग बजट नहीं होता।
लेकिन स्वास्थ्य केवल जिम की मशीनों से नहीं बनता।
चलना भी व्यायाम है।
सीढ़ियां चढ़ना भी शारीरिक गतिविधि है।
घर के काम करना भी शारीरिक गतिविधि है।
सुबह या शाम 20-30 मिनट तेज चलना भी एक अच्छी शुरुआत हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता के लिए भी लाभकारी है। वयस्कों के लिए संगठन सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि की सलाह देता है। साथ ही, यह भी स्पष्ट करता है कि कुछ गतिविधि करना बिल्कुल निष्क्रिय रहने से बेहतर है।
इसका अर्थ यह नहीं कि आपको सोमवार से सुबह पांच बजे उठकर दौड़ना शुरू कर देना चाहिए।
शुरुआत बहुत छोटी रखिए।
शाम को खाना खाने के बाद 20 मिनट चलिए।
मोबाइल पर बात करते समय कमरे में टहल लीजिए।
पास की दुकान तक जाने के लिए वाहन की जगह पैदल जाने की कोशिश कीजिए।
कई बार हम सोचते हैं कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए बहुत पैसा चाहिए।
असल में शुरुआत के लिए सिर्फ थोड़ा समय और इच्छा चाहिए।
3. कोई ऐसी कला सीखिए जिससे आपकी कीमत बढ़े

खाली समय का सबसे अच्छा उपयोग वह हो सकता है जो आने वाले वर्षों में आपकी कमाई की क्षमता बढ़ा दे।
मान लीजिए आप नौकरी करते हैं और रोज रात को आपके पास एक घंटा बचता है।
आप उस एक घंटे को मनोरंजन में खर्च कर सकते हैं।
या उसी एक घंटे में कोई नया कौशल सीख सकते हैं।
कंप्यूटर।
अंग्रेजी।
वीडियो संपादन।
लेखन।
ग्राफिक डिजाइन।
बिक्री करना।
डिजिटल विपणन।
लेखा।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपकरण।
अपने वर्तमान काम से संबंधित कोई नई तकनीक।
इनमें से किसी एक चीज को चुनकर छह महीने तक लगातार सीखने की कोशिश कीजिए।
यह जरूरी नहीं कि छह महीने बाद आपको तुरंत दूसरी नौकरी मिल जाए या आपकी आय दोगुनी हो जाए।
लेकिन आपके पास पहले से ज्यादा क्षमता जरूर होगी।
यही अंतर धीरे-धीरे महत्वपूर्ण बनता है।
एक मध्यवर्गीय व्यक्ति के लिए कौशल केवल ज्ञान नहीं है।
कौशल भविष्य की आय का बीज है।
यहां भी एक गलती होती है।
हम एक साथ पांच चीजें सीखना शुरू कर देते हैं।
आज शेयर बाजार।
कल वीडियो संपादन।
परसों अंग्रेजी।
फिर कोई नया ऑनलाइन पाठ्यक्रम।
कुछ सप्ताह बाद सब बंद।
इसके बजाय एक समय में एक कौशल चुनिए।
रोज 30 मिनट।
छोटे कदम।
लंबा समय।
यही तरीका अधिक व्यावहारिक है।
4. अपने परिवार और अच्छे रिश्तों के लिए समय निकालिए

यह बात शायद उत्पादकता की सूची में सबसे कम दिखाई देती है, लेकिन जीवन में इसका महत्व बहुत बड़ा है।
हम पैसा कमाने के लिए समय देते हैं।
करियर बनाने के लिए समय देते हैं।
मोबाइल को समय देते हैं।
लेकिन कई बार उन्हीं लोगों के लिए समय नहीं निकालते जिनके कारण हम इतनी मेहनत कर रहे होते हैं।
मां से दस मिनट बात करना।
पिता के साथ चाय पीना।
भाई या बहन से बात करना।
अपने जीवनसाथी के साथ बिना मोबाइल के बैठना।
किसी पुराने दोस्त को फोन करना।
ये छोटी चीजें दिखाई नहीं देतीं, लेकिन जीवन में इनकी कीमत बहुत बड़ी होती है।
Harvard Study of Adult Development से जुड़े शोध में लंबे समय से यह पाया गया है कि मजबूत और अच्छे सामाजिक संबंध खुशी, स्वास्थ्य और लंबी उम्र से जुड़े होते हैं।
मध्यवर्गीय जीवन में यह और भी महत्वपूर्ण है।
क्योंकि जब मुश्किल समय आता है, तब बैंक खाते में मौजूद पैसा ही हमारा पूरा सहारा नहीं होता।
कभी किसी का फोन जरूरी होता है।
कभी किसी का साथ।
कभी सिर्फ इतना कि कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के पूछ दे—
“सब ठीक है?”
इसलिए खाली समय का कुछ हिस्सा उन लोगों को दीजिए जो आपके जीवन में सचमुच महत्वपूर्ण हैं।
5. अपने पैसे और भविष्य की समीक्षा कीजिए

यह आदत खास तौर पर मध्यवर्गीय लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
कई लोग महीने भर पैसा कमाते हैं और फिर महीने के अंत में सोचते हैं—
“पैसा गया कहां?”
अगर आपके पास हर महीने केवल 15 मिनट भी हैं, तो बैठकर अपने खर्च लिखिए।
किराया कितना?
राशन कितना?
यात्रा पर कितना?
बाहर खाने पर कितना?
ऑनलाइन खरीदारी पर कितना?
अनावश्यक सदस्यताओं पर कितना?
कर्ज की किस्त कितनी?
और बचत कितनी?
जब तक पैसा लिखा नहीं जाता, तब तक कई खर्च दिखाई ही नहीं देते।
मान लीजिए कोई व्यक्ति रोज केवल ₹100 ऐसी चीज पर खर्च कर देता है जिसकी उसे वास्तव में आवश्यकता नहीं थी।
₹100 प्रतिदिन का अर्थ लगभग ₹3,000 प्रति माह है।
छोटी रकम लगती है।
लेकिन मध्यवर्गीय परिवार के लिए ₹3,000 बहुत छोटी रकम नहीं होती।
इसीलिए सप्ताह में एक दिन 15-20 मिनट अपनी वित्तीय स्थिति देखने के लिए निकालना बहुत उपयोगी आदत हो सकती है।
यह निवेश की सलाह नहीं है।
यह केवल अपने पैसे के प्रति जागरूक होने की बात है।
Warren Buffett की सोच में भी लंबे समय की दृष्टि और सही निर्णय का महत्व बार-बार दिखाई देता है। उनकी वार्षिक शेयरधारक चिट्ठियों में बचत, पूंजी के उपयोग और गलत निर्णयों से सीखने जैसे विषय लगातार सामने आते रहे हैं।
हर व्यक्ति निवेशक नहीं बनना चाहता।
लेकिन हर व्यक्ति को अपने पैसे का जिम्मेदार मालिक जरूर बनना चाहिए।
6. कुछ बनाइए, केवल उपभोग मत कीजिए

आज हम ज्यादातर समय चीजें देखने में बिताते हैं।
दूसरों की तस्वीरें देखते हैं।
वीडियो देखते हैं।
दूसरों की सफलता देखते हैं।
दूसरों का घर देखते हैं।
दूसरों की यात्रा देखते हैं।
दूसरों का व्यवसाय देखते हैं।
लेकिन सवाल यह है—
हम खुद क्या बना रहे हैं?
आप कोई लेख लिख सकते हैं।
डायरी लिख सकते हैं।
चित्र बना सकते हैं।
वीडियो बना सकते हैं।
किसी विषय पर ब्लॉग शुरू कर सकते हैं।
अपने काम से जुड़ा छोटा प्रोजेक्ट बना सकते हैं।
अपने कमरे की व्यवस्था सुधार सकते हैं।
किसी पुराने विचार को कागज पर उतार सकते हैं।
कुछ बनाना जरूरी नहीं कि पैसा कमाने के लिए ही हो।
कुछ बनाना अपने दिमाग को सक्रिय रखने के लिए भी जरूरी है।
जब आप केवल सामग्री देखते हैं, तो आप दर्शक होते हैं।
जब आप कुछ बनाते हैं, तो आप निर्माता बनते हैं।
और निर्माता बनने की प्रक्रिया में आत्मविश्वास धीरे-धीरे बढ़ता है।
शुरुआत में आपका काम अच्छा नहीं होगा।
कोई बात नहीं।
पहला लेख कमजोर होगा।
पहला वीडियो सामान्य होगा।
पहला डिजाइन साधारण होगा।
लेकिन दसवां काम पहले से बेहतर हो सकता है।
यही अभ्यास है।
यही विकास है।
7. कुछ समय बिल्कुल शांत रहिए

यह सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है।
खाली समय का अर्थ यह नहीं कि हर मिनट को उत्पादक बनाना जरूरी है।
इंसान मशीन नहीं है।
काम के बाद आराम भी जरूरी है।
लेकिन आराम और लगातार मोबाइल देखने में अंतर है।
कभी फोन एक तरफ रखकर बैठिए।
थोड़ा संगीत सुनिए।
चाय पीजिए।
छत पर जाइए।
खिड़की के पास बैठिए।
अपने दिन के बारे में सोचिए।
आज क्या अच्छा हुआ?
क्या गलत हुआ?
कल क्या बेहतर किया जा सकता है?
किस बात की चिंता है?
किस चीज के लिए आभारी हैं?
ऐसे प्रश्न दिमाग को व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं।
कई बार हमारे पास समस्या का समाधान इसलिए नहीं आता क्योंकि हम लगातार शोर में रहते हैं।
हर कुछ मिनट में सूचना।
हर कुछ मिनट में संदेश।
हर कुछ मिनट में वीडियो।
ऐसे वातावरण में मन को रुकने का अवसर ही नहीं मिलता।
इसलिए प्रतिदिन कुछ समय बिना किसी स्क्रीन के बिताना भी एक अच्छी आदत हो सकती है।
और अगर आप बहुत थके हुए हैं, तो आराम कीजिए।
आराम करना आलस नहीं है।
बिना अपराधबोध के किया गया आराम भी जीवन का हिस्सा है।
आखिर असली समस्या खाली समय नहीं है
जब हम कहते हैं कि “मैं अपना समय बर्बाद कर रहा हूं”, तो हमें थोड़ा ईमानदार होकर देखना चाहिए कि हमारा समय जा कहां रहा है।
क्या हम सच में आराम कर रहे हैं?
या सिर्फ मोबाइल पर एक वीडियो से दूसरे वीडियो तक जा रहे हैं?
क्या हम मनोरंजन कर रहे हैं?
या दूसरों की जिंदगी देखकर अपनी जिंदगी से असंतुष्ट हो रहे हैं?
क्या हम सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं?
या सोशल मीडिया हमारा उपयोग कर रहा है?
मध्यवर्गीय व्यक्ति के पास समय की कमी जरूर होती है, लेकिन हर दिन कुछ छोटे हिस्से ऐसे होते हैं जिन पर हमारा नियंत्रण होता है।
शायद 20 मिनट।
शायद आधा घंटा।
शायद रविवार का एक घंटा।
हमें अपनी पूरी जिंदगी एक दिन में बदलने की जरूरत नहीं है।
बस उस छोटे से समय का थोड़ा बेहतर उपयोग करना है।
आज 10 पन्ने पढ़िए।
कल 20 मिनट चलिए।
परसों आधा घंटा कोई कौशल सीखिए।
सप्ताह में एक दिन अपने खर्च देखिए।
परिवार के साथ बैठिए।
कुछ बनाइए।
और कभी-कभी बिल्कुल आराम कीजिए।
यही छोटे कदम मिलकर जीवन की दिशा बदल सकते हैं।
निष्कर्ष: समय की कीमत अमीर और गरीब के लिए अलग नहीं होती
हम अक्सर सोचते हैं कि सफल लोगों के पास हमसे ज्यादा समय होता है।
असल में ऐसा नहीं है।
दिन सबके लिए 24 घंटे का ही है।
अंतर अक्सर इस बात में होता है कि उन घंटों में से कितना समय हम जानबूझकर इस्तेमाल करते हैं।
मध्यवर्गीय व्यक्ति के पास शायद बहुत पैसा न हो।
शायद बहुत सुविधाएं न हों।
शायद परिवार की जिम्मेदारियां ज्यादा हों।
शायद नौकरी के बाद शरीर और दिमाग दोनों थके हुए हों।
फिर भी उसके पास एक चीज होती है—
हर दिन कुछ छोटे निर्णय लेने की क्षमता।
आप अपने खाली समय का पूरा हिस्सा उत्पादक बनाने की कोशिश मत कीजिए।
बस इतना तय कीजिए कि आपका पूरा खाली समय मोबाइल के हवाले नहीं होगा।
कुछ समय शरीर को।
कुछ समय दिमाग को।
कुछ समय परिवार को।
कुछ समय भविष्य को।
कुछ समय अपने सपनों को।
और कुछ समय खुद को आराम देने के लिए।
यही संतुलन लंबे समय में बहुत बड़ा अंतर पैदा कर सकता है।
क्योंकि जिंदगी अचानक नहीं बदलती।
वह रोजमर्रा की छोटी आदतों से बदलती है।
और शायद आज आपके पास जो सिर्फ 30 मिनट खाली हैं, वे देखने में छोटे हों।
लेकिन अगर आप उन्हें सही दिशा में लगाते रहे, तो कुछ वर्षों बाद यही 30 मिनट आपकी जिंदगी की सबसे अच्छी निवेशों में से एक साबित हो सकते हैं।
समय को केवल काटिए मत।
उसे अपने भविष्य में लगाइए।
Presented by Gaurav Kumar
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